Eid UL Fitr 2022 Special Story: एक हजार साल का इतिहास समेटे है मेरठ की शाही जामा

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Eid UL Fitr 2022 Special Story: एक हजार साल का इतिहास समेटे है मेरठ की शाही जामा

Eid UL Fitr 2022 Special Story- इतिहास के पन्नों पर कई ऐसी इबारतें दर्ज हैं जिनपर वक्त की धुल तो पड़ी लेकिन उसकी हस्ती आज भी बरकरार है। क्योंकि उन इबारतों को सहेजने के लिए कई हाथ हमेशा आगे रहते हैं। ऐसी ही है मेरठ के कोतवाली मोहल्ले की शाही जामा मस्जिद जो ऐतिहासिक मस्जिदों में शुमार है। एक हजार साल पुरानी इस जामा मस्जिद का जिक्र देश ही नहीं विदेश में रहने वाले लोग भी करते हैं। यही नहीं बाहर से आने वाले लोग उत्तर प्रदेश की इस ऐतिहासिक मस्जिद की इमारत को देखने के लिए, नमाज अदा करने के लिए भी जाते हैं।

महमूद गजनवी ने पढ़ी थी यहां नमाज

कई सौ वर्ग मीटर में फैली इस जामा मस्जिद का निर्माण महमूद गजनवी ने कराया था। महमूद गजनवी ने पहली बार इस मस्जिद में नमाज 570 हिजरी ईस्वी में पढ़ी थी। उकसे बाद से यह मस्जिद में पांचों वक्त अजान की आवाज बुलंद होती है। लोग नमाज पढ़ते हैं। खास बात यह है कि यह मस्जिद आज भी बेहतर स्थिति में है। एक हजार साल का इतिहास अपने आप में समेटे हुए इस मस्जिद को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में अपने संरक्षण में लेने के लिए भारत सरकार मस्जिद प्रबंधन से कह चुकी है, लेकिन प्रबंधन ने मना कर दिया था। इस मस्जिद का रखरखाव और खर्चा लोगों से चंदा लेकर होता है।

राजस्थान के कारीगर ने पत्तरों पर उकेरी आयतें

लाल पत्थरों से बनी इस मस्जिद की नक्काशी को देखने से लगता है कि कारीगरों ने इसपर धागे से कढ़ाई की है। मस्जिद के दरवाजे के पत्थरों पर उकेरी गई कुरआन की आयतों को लोग बस देखते ही रह जाते हैं। खास बासत यह है कि पत्तरों पर इन आयतों को उकेरा है राजस्थान के एक गैर मुस्लिम गारीगर ने। इस कारीगर के हुनर को देखकर काज़ी भी हैरान थे। वहीं इस जामा मस्जिद की दीवारे चूने और मिट्टी से बनी हैं जो कि करीब दस फीट चौड़ी हैं।जब से मस्जिद का निर्माण हुआ है उसके बाद से इसमें काफी बदलाव आए हैं। मस्जिद की दीवारों पर ऐसी बेहतरीन नक्काशी की गई है कि इनको देखने का बरबस ही मन करता है। मस्जिद के भीतर मई और जून में भी ऐसा मौसम रहता है जैसा कि नवंबर और दिसंबर में रहता है। यानी यहां पर बिना पंखा और बिना एसी के बहुत ही शानदार मौसम रहता है। Read More: Meerut Region News In Hindi